Pratapgarh News: मुख्यालय प्रतापगढ़ कचेहरी के बगल बलीपुर के पंचमुखी देवी मंदिर को मिलेगा भव्य “सिंह द्वार”, बसंत पंचमी पर होगा लोकार्पण

Pratapgarh News: मुख्यालय प्रतापगढ़ कचेहरी के बगल बलीपुर स्थित अति प्राचीन पंचमुखी देवी मंदिर के मुख्य द्वार का भव्य निर्माण कार्य इन दिनों पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और जनसहयोग का प्रतीक बन गया है। 9वीं शताब्दी में स्थापित यह ऐतिहासिक मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र रहा है। अब मंदिर की गरिमा और दिव्यता को और अधिक निखारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इसके मुख्य गेट का निर्माण कराया जा रहा है।

इस भव्य द्वार का नाम “सिंह द्वार” रखा गया है, जो शक्ति, साहस और श्रद्धा का प्रतीक माना जा रहा है। सिंह द्वार का निर्माण समाजसेवी एवं कर्मचारी यूनियन के प्रख्यात नेता हेमंत नंदन ओझा के नेतृत्व में कराया जा रहा है। श्री ओझा न केवल सामाजिक कार्यों के लिए जाने-पहचाने नाम हैं, बल्कि वे विभिन्न जनहितकारी दायित्वों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं। उनके साथ क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों एवं श्रद्धालुओं का भी उल्लेखनीय सहयोग इस पुनीत कार्य में मिल रहा है।
बताया जा रहा है कि सिंह द्वार पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और आधुनिक शिल्पकला का सुंदर संगम होगा, जो मंदिर की ऐतिहासिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ करेगा। यह द्वार न केवल मंदिर की शोभा बढ़ाएगा, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी एक विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।

इस भव्य सिंह द्वार का लोकार्पण बसंत पंचमी के पावन अवसर पर 23 जनवरी 2026 को अपराह्न 2 बजे किया जाएगा। लोकार्पण समारोह को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह का माहौल है। श्रद्धालु इस शुभ घड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि श्री हेमंत नंदन ओझा द्वारा मंदिर के लिए किया जा रहा यह प्रयास न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा। मंदिर समिति और पुजारी वर्ग ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्माण कार्य सामाजिक एकता और सामूहिक सहयोग की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।

पंचमुखी देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि यह क्षेत्र की आत्मा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। मां पंचमुखी देवी के दरबार में श्रद्धालुओं को सदैव शांति, शक्ति और संकल्प की अनुभूति होती है। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां के चरणों में शीश नवाता है, उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।
निश्चित रूप से, बलीपुर का पंचमुखी देवी मंदिर अपने नए सिंह द्वार के साथ न केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत को और अधिक समृद्ध करेगा, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

रिपोर्ट उमेश पाण्डेय जिला संवाद दाता यूनाईटेड भारत

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