
India Japan Strategic Dialogue: भारत और जापान के बीच यहां रणनीतिक संवाद हुआ, जिसमें विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उनके जापानी समकक्ष तोशिमित्सु मोतेगी के बीच गंभीर वैश्विक मुद्दों पर बातचीत के साथ ही कुछ हल्के-फुल्के क्षण भी देखने को मिले।

बैठक के दौरान डॉ. जयशंकर ने आर्थिक सुरक्षा को सबसे अहम मुद्दा बताते हुए कहा कि बदलते वैश्विक हालात में भारत और जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी जरूरी है। वहीं बैठक से इतर दोनों पक्षों के बीच क्रिकेट का तड़का भी देखने को मिला।
जयशंकर ने ‘एक्स’ पर जापानी भाषा में एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने कहा जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। आज जब हम इंडिया-जापान स्ट्रेटेजिक डायलॉग कर रहे हैं, तो मुझे यह जानकर और भी खुशी हो रही है कि मेरी तरह, मंत्री मोतेगी भी क्रिकेट के शौकीन हैं।
रणनीतिक संवाद के बीच एक हल्का-फुल्का पल तब आया, जब डॉ. जयशंकर ने बताया कि उन्हें मोतेगी में क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि देखने को मिली है। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि उन्होंने जापान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की जर्सी प्राप्त की और बदले में अपने समकक्ष को भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा हस्ताक्षरित बल्ला भेंट किया। जयशंकर ने भविष्य में जापान में उनके साथ क्रिकेट मैच देखने की उम्मीद जताई और मुस्कुराते हुए कहा, ‘उम्मीद है एक दिन हम पिच पर मिलेंगे।’
वहीं, वार्ता में जयशंकर ने अपने शुरुआती वक्तव्य में कहा कि भारत जापान के साथ साझेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में दोनों देशों का रिश्ता केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक, रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में बदल चुका है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के संदर्भ में साझा सोच पर जोर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे का 2007 में भारतीय संसद में दिया गया ‘कनफ्लुएंस ऑफ द टू सीज’ भाषण आज के इंडो-पैसिफिक ढांचे की नींव बना। जयशंकर के अनुसार, भारत की ‘महासागर’ पहल और जापान का ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ दृष्टिकोण एक-दूसरे के पूरक हैं।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)



