
Vaishno Devi Medical College: जम्मू-कश्मीर में श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। इस फैसले को लेकर शिवसेना के नेताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और केंद्र सरकार पर सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। शिवसेना का कहना है कि जिस मेडिकल कॉलेज को प्रधानमंत्री ने एक समय क्षेत्र के लिए “तोहफा” बताया था, उसी तोहफे को अब छीन लिया गया है।
शिवसेना नेताओं ने कहा कि इस मेडिकल कॉलेज से हजारों परिवारों की उम्मीदें जुड़ी थीं। अभिभावक चाहते थे कि उनके बच्चे डॉक्टर बनें, समाज और देश की सेवा करें और देश का नाम रोशन करें, लेकिन कॉलेज की मान्यता रद्द होने से छात्रों का भविष्य अंधकार में चला गया है। पार्टी का आरोप है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था और छात्रों के भविष्य की चिंता किए ऐसा फैसला लेना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।
शिवसेना ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा जिस मेडिकल कॉलेज को विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रतीक बताया गया था, आज उसी संस्थान को बंद जैसी स्थिति में पहुंचा देना सरकार की कथनी और करनी के अंतर को दिखाता है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार ने तुरंत इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो छात्र, अभिभावक और स्थानीय लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि या तो मेडिकल कॉलेज की मान्यता तत्काल बहाल की जाए, या फिर वहां पढ़ रहे छात्रों को किसी अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए। शिवसेना ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक कॉलेज का मामला नहीं, बल्कि हजारों बच्चों के सपनों और पूरे क्षेत्र के भरोसे का सवाल है।
मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने से जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य शिक्षा और स्थानीय युवाओं के अवसरों पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि वह इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और छात्रों के भविष्य को लेकर क्या ठोस कदम उठाती है।



