
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की अवधि एक सप्ताह बढ़ा दी है। अब अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2025 को जारी की जाएगी। यह विस्तार उस समय हुआ है, जब संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है और इस मुद्दे पर राजनीतिक गर्माहट बढ़ने की आशंका है।
ड्राफ्ट लिस्ट जारी करने की नई टाइमलाइन
चुनाव आयोग द्वारा जारी तीन पन्नों के आदेश के अनुसार कि पहले SIR की गणना प्रक्रिया 4 दिसंबर को समाप्त होनी थी, ड्राफ्ट लिस्ट 9 दिसंबर को जारी होनी थी। लेकिन नई समय-सारिणी के मुताबिक, गणना 11 दिसंबर को पूरी होगी, ड्राफ्ट लिस्ट 16 दिसंबर को पब्लिश होगी, और फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी को जारी की जाएगी।
आयोग ने राज्यों के चुनाव अधिकारियों से कहा कि ड्राफ्ट लिस्ट की तैयारी और सत्यापन के लिए उन्हें अतिरिक्त समय दिया गया है, ताकि प्रक्रिया अधिक सटीक और पारदर्शी हो सके।
बीएलओ पर बढ़ा दबाव, विपक्ष ने उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर SIR प्रक्रिया का शेड्यूल बदलने की मांग की थी। उनका कहना है कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को बेहद कम समय में घर-घर जाकर सत्यापन करने के कारण अत्यधिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बीएलओ की आत्महत्या की खबरें सामने आने के बाद इस मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। खासकर पश्चिम बंगाल में अगले साल चुनाव होने के कारण SIR प्रक्रिया को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
35 लाख नामों के हटने का अनुमान
चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए जाने वाले वोटरों के अनुमानित आंकड़े में बढ़ोतरी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 35 लाख नाम हटाए जा सकते हैं। इनमें शामिल हैं – 18.70 लाख मृतक मतदाता, डुप्लीकेट वोटर्स, ऐसे लोग जिनका पता उपलब्ध नहीं, और वे मतदाता जो स्थायी रूप से अन्य राज्यों में जा चुके हैं।
आयोग का कहना है कि यह सुधार प्रक्रिया मतदाता सूची को अपडेट और त्रुटिहीन बनाने के लिए जरूरी है।
SIR अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
भारतीय किसान यूनियन (आजाद) ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया की अवधि तीन महीने बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि चार सप्ताह में 15.35 करोड़ मतदाताओं का घर-घर सत्यापन कर पाना प्रशासनिक रूप से असंभव है। इससे बड़ी संख्या में लोगों का नाम गलत तरीके से हट सकता है और मताधिकार प्रभावित होने का खतरा है।
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SIR प्रक्रिया यूपी में 4 नवंबर से शुरू हुई थी और 4 दिसंबर तक बीएलओ को मतदाता विवरण सत्यापित करने और अपडेट करने का कार्य पूरा करना था। याचिकाकर्ता ने कहा है कि अधिक समय मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं को राहत मिलेगी और मतदाता सूची अधिक सटीक बन सकेगी।



