
Kolkata News-पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर रामनवमी के मौके पर दंगा भड़काने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश कर रही है, लेकिन बंगाल के लोग किसी भी हाल में दंगे को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ममता बनर्जी ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “बंगाल की संस्कृति शांति और सद्भाव का संदेश देती है। हम रामकृष्ण परमहंस को मानते हैं, लेकिन ‘जुमला पार्टी’ को नहीं।” उन्होंने साफ कहा कि राज्य में किसी भी तरह की सांप्रदायिक हिंसा की कोशिश सफल नहीं होने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में बंगाल में ईद का त्योहार पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। इसी तरह आने वाले रामनवमी और अन्नपूर्णा पूजा जैसे त्योहारों को भी शांति से मनाया जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा, “धर्म का राजनीतिकरण मत करिए। मैं ‘जुमला पार्टी’ से कहूंगी कि वे बसंती पूजा और अन्नपूर्णा पूजा करें, धर्म का मतलब कर्म होता है। मानवता को अपनाइए, दानवता को नहीं।”
ममता बनर्जी ने भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी योजनाबद्ध तरीके से रामनवमी के दौरान दंगे भड़काने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा, “लोगों के बीच फूट डालने और दंगे भड़काने के लिए ये लोग एक नया धर्म लेकर आए हैं। यह धर्म रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, तपोवन, वेद और उपनिषदों का धर्म नहीं है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा राज्य में रामनवमी के नाम पर सांप्रदायिक माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। इसके लिए पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपये खर्च कर पोस्टर और बैनर लगाए जा रहे हैं। गेरुआ खेमे की योजना रामनवमी के मौके पर एक करोड़ लोगों को सड़कों पर लाने की है।
ममता बनर्जी ने गांधी जी का जिक्र करते हुए कहा, “महात्मा गांधी ने देश की आजादी से पहले दंगों को रोकने के लिए अनशन किया था। क्या हम उस इतिहास को भूल जाएंगे?” उन्होंने दावा किया कि भाजपा सोची-समझी रणनीति के तहत बंगाल की शांति भंग करने की कोशिश कर रही है, लेकिन उनकी सरकार ऐसा नहीं होने देगी।
मुख्यमंत्री ने अपने हालिया लंदन दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ कुछ लोगों ने विदेश में प्रदर्शन किया और मुझसे पूछा कि क्या मैं हिंदू हूं। मैं भाजपा को जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हूं।”
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ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार धर्म के पालन के खिलाफ नहीं है, लेकिन सभी धार्मिक कार्यक्रमों को नियमों और प्रशासनिक निर्देशों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग किसी भी हालत में सांप्रदायिक हिंसा को स्वीकार नहीं करेंगे और उनकी सरकार इसे रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।