Technology News: एक लिंक, पूरा नियंत्रण: स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम से लाखों की चोरी

AnyDesk और TeamViewer जैसी एप्स का इस्तेमाल कर फ्रॉड्स कैसे चुराते हैं बैंक अकाउंट की जानकारी और पैसे, जानें पूरी कहानी और सावधानियां

Technology News: आज डिजिटल दुनिया में फ्रॉड के तरीके लगातार विकसित हो रहे हैं। पारंपरिक साइबर फ्रॉड्स के विपरीत, स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम सीधे पीड़ित के डिवाइस तक पहुंचते हैं, जिससे उनका पूरा वित्तीय डेटा चुराना आसान हो जाता है। भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए यह एक खतरनाक नया ट्रेंड बन चुका है।

कैसे काम करता है स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम?

स्क्रीन-शेयरिंग फ्रॉड में हमलावर पीड़ित को किसी लिंक या एप्लिकेशन के जरिए अपने डिवाइस का रिमोट कंट्रोल देने के लिए मनाते हैं। आम बहाने हैं:

  • बिजली या अन्य बिल का भुगतान

  • ग्राहक सहायता / तकनीकी सपोर्ट

  • KYC अपडेट या रिफंड

एक उदाहरण के अनुसार, महाराष्ट्र में एक वरिष्ठ उपयोगकर्ता को यह संदेश मिला कि उनका बिजली कनेक्शन काटा जाएगा। संदेश में एक लिंक था, जिस पर क्लिक करने के बाद उसने अपने बैंक डिटेल्स दर्ज किए। मात्र 15 मिनट में उसके खाते से ₹6.52 लाख से ज्यादा की राशि निकाल ली गई

इस प्रकार के फ्रॉड में AnyDesk, TeamViewer जैसे टूल्स का उपयोग आम है, लेकिन यह केवल तकनीकी उपकरण नहीं हैं। ये स्कैम्स बैंकिंग ऐप्स, व्यक्तिगत डेटा और नोटिफिकेशन तक लाइव पहुंच देते हैं।

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क्यों होते हैं सफल?

अमित रेलान, CEO, mFilterIt के अनुसार, “ये स्कैम्स तकनीकी जटिलता के कारण नहीं बल्कि भरोसा और तत्कालता के दबाव के कारण सफल होते हैं। कुछ मिनट की रिमोट एक्सेस ही अपराधियों को पूरे वित्तीय लेन-देन का नक्शा बनाने और ट्रांजैक्शन करने के लिए पर्याप्त होती है।”

स्मार्टफोन के युग में, एक डिवाइस में वॉलेट, बैंक और पहचान जुड़ी होती है। स्क्रीन एक्सेस का मतलब लगभग पूरा खाता एक्सेस है।

स्क्रीन शेयरिंग पर क्या सावधानियां अपनाएं?

  • कभी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।

  • सिर्फ आधिकारिक ऐप और वेबसाइट पर ही भुगतान करें।

  • किसी भी कॉल या टेक सपोर्ट को अपनी स्क्रीन शेयर करने की अनुमति न दें।

  • नोटिफिकेशन और OTP को किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

सरकारी और संस्थागत चेतावनी

MSEDCL और अन्य संस्थाओं ने अपने ग्राहकों को बार-बार चेतावनी दी है कि वे केवल सत्यापित स्रोतों से ही संदेश प्राप्त करें। SMS हमेशा ऑफिसियल ID जैसे VM-MSEDCL या AM-MSEDCL से आते हैं, निजी नंबर से नहीं।

स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम के मामले लगातार बढ़ रहे हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम OTP और फ़िशिंग स्कैम के साथ मिलकर और अधिक प्रभावशाली हो गए हैं। अपराधी पीड़ित को विश्वास दिलाकर और तुरंत कार्रवाई के दबाव में डालकर बड़ी रकम निकाल लेते हैं। ऐसे में डिजिटल उपयोगकर्ताओं के लिए सतर्क रहना और समय पर पहचानना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

Written By: Anushri Yadav

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